तहू लेले न मजा संगी रे..

तहू लेले न मजा संगी रे
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दुनिया चटक मटक हे,
तै काबर अटकगे।
छिलका ल भिखारी खावय,
गुदा ल नेता शिकारी खावय।
तहू लेले न मजा संगी रे...
तहू लेले न मजा संगी रे...

फाईल फाईल म अटकत हे,
नेता योजना ल गटकत हे।
मोर आवास कईसे नई आईस,
कहि कोनो सरपंच ल पटकत हे।
तहू योजना ल गटकना संगी रे....

समारु पागे कुंदरू बारी,
बुधारू के डुबगे तरकारी।
एके हाथे भुईंया बर भैया,
होवत हावय मारा मारी।
जा छोड़ा देना तहू संगी रे...

गुड़ाखू धरे मोटियारी ह,
अंगरी तरी चुहत हे।
कोनो सरेरय ऐड़ी म,
त कोनो होठ म चाटत हे।
कोनो दबाये रंधनी म
कहू चरोटा बीजा फुटय।
छटक परिस गला म त
खोवत साग म थुकय।
जा चाट चाट के खाना संगी रे...
तहू लेले न मजा संगी रे....

         पवन नेताम 'श्रीबासु'
         सिल्हाटी,स/लोहारा

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