बेताब तमन्ना

बेताब तमन्नाओं की कसक रहने दो।
आँख आसुओं का दरिया है बहने दो।
अभी मत छेड़ जिक्र मोहाब्बत का पवन,
उनका भी दर्द-सितम थोड़ा बढ़ने दो।

ये नैन मट्टका नैनाचार कब तक चलेगी।
इन रशीली होंठों को भी कुछ कहने दो।।

ये मामूली तूफां नही जो थम जाये।
ये ईश्क का कहर है इसे बढ़ने बढ़ने दो।।

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