ममता

सागर की लहरे जैसे किनारो पे छलकता है।
कलियो की खुशबू बगवन मे महकता है।
माँ तेरी सच्चाईयो पर सिर्फ इतना कहू,
जन्नते आलम माँ तेरी ममता मे झलकता है।
                               पवन नेताम 'श्रीबासु'

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