मुक्तक


फिर कोई मेहंदी लगा रही है
फिर कोई तुझे  तड़पा रही है
पवन तेरी किस्मत फूटी है,
फिर कोई छोड़कर जा रही है
      पवन नेताम 'श्रीबासु'

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