पोरा पटकना
पोरा पटकना पोरा तिहार के एक अऊ अंग जेन ल पोरा तिहार के संझा बेरा मनायें जाथे। जेन ल पोरा पटकना कहिथे। पोरा पटके के दू कारन सुने ल मिलथे । जेमा पहली धार्मिक कारन हे, द्वापर जुग म पोरासुर नाम के राक्षस रिहिस जेन ल भगवान कन्हैया ह गांव के मेड़ों म पटक-पटक के मारे रिहिस तेखर सेती आज ले पोरा ल पटक के तिहार ल मनाये जाथे। पोरासुर ल कन्हैया द्वारा पटके गिस,गांव ले भगाये गिस त पोरासुर कहिस प्रभु भाग तो जहुं पर मैं खाहू-पीहू काला ? त कन्हैया द्वारा कहे गिस कि तै खेत-खार के किट पतंगा ल खाबे अऊ मेड़ो के भीतरी घुसन झन देबे। दूसर गोठ लोक मान्यता सुने ल मिलथे कि पोरा म ठेठरी-खुरमी ल भरके गांव के मेड़ों म पटके जाथे। एखर संदर्भ कहिथे कि हमर फसल के नाश करइयां ल खाथे तेखर सेती शुरूआत म ठेठरी-खुरमी ले मुंह मीठा कराये जाथे तहां ले फसल के कटत ले किट पतंगा मन ल खावत राहय। कुल मिलाके ए मान्यता के पाछू भाव हे कि गांव अऊ ...