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मई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

छत्तीसगढ़ के धन्यवाद

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छत्तीसगढ़ी म पहिली धन्यवाद के जघा येला बउरय,,अइसे काहन त आभार प्रगट करे बर सियान मन ये काहय--- 1. जुग जुग जियो  2.दुधे नहाव,पूतो फलो 3.चार गांव के गौटियाँ बन 4.तोर पांव म काँटा झन गड़े 5. तोर एक के एक्कइस होवय 5. तोर चुरी अमर रहय 6.तोर अन्न धन के भंडार भरे राहय 7.भगवान तोर भला करय 8.ककरो नजर झन लगय 9. तोर जोड़ी जांवर अमर रहय 10. कभु तोला कोनो मेर आँच झन आवय 11.दुधे पियो,दुधे अंचोवव  12.जा तोला सबरदिन ऊँच पीढ़ा मिलय 13. तोर मुँह म दूध भात 14.डलिया के तोपात ले जियव।          आदि अइसन बोल के शुभकामना देवंय,, तेन आज नवा दौर म धन्यवाद म बदल गे,, कतेक सुघ्घर राहय पहिली आभार प्रगट करे के भाव,,,बड़ निक लागय, अइसन आसीस भरे बचन सुन के मन गदगद हो जाय ।                  -- *राजकुमार मसखरे*     भदेरा (पैलिमेटा) राजनांदगांव

पत्रकार गिध्द

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*_गिरधर गोपाल साहू जी के फेसबुक वाल से साभार.._* केविन कार्टर में अंतरात्मा थी: क्या हमारे पत्रकारों में भी है? *गिद्ध*  क्या आपको उस चित्र की याद है?  उस चित्र का नाम है-  *‘गिद्ध और छोटी बच्ची’*। इस चित्र में एक गिद्ध, भूखी बच्ची की मृत्यु का इंतजार कर रहा है। एक दक्षिण अफ्रीकी फोटो पत्रकार केविन कार्टर ने इसे मार्च 1993 के अकाल में सूडान में खींचा था। उस फिल्म के लिए उसे पुलित्जर पुरस्कार दिया गया था। लेकिन इतना सम्मान प्राप्त करने के बाद भी कार्टर ने 33 वर्ष की उम्र में आत्महत्या कर ली थी।  उस आत्महत्या का कारण क्या था? वास्तव में, जब वह सम्मान मिलने की खुशी मना रहा था, और उस पुरस्कार का समाचार अनेक टीवी समाचार चैनलों पर दिखाया जा रहा था, उसी समय किसी ने उससे एक टेलीफोन इंटरव्यू में पूछा कि अन्त में उस लड़की का क्या हुआ?  कार्टर ने उत्तर दिया कि मैं कुछ कह नहीं सकता, क्योंकि मैं अपनी उड़ान पकड़ने की जल्दी में था।   ‘वहाँ कितने गिद्ध थे?’ उसी आदमी ने पूछा।  कार्टर ने कहा, ‘मैं समझता हूँ कि वहाँ एक ही था।’ टेलीफोन पर दूसरी ओर से बात कर रहे व्यक्ति ...

वैक्सीन लगवाना हे

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भैया समारू अफवाह मे नइ जाना हे। हम सब ल जाके वैक्सीन लगवाना हे। वैक्सीन लगवाके इहा कोनो नइ मरत हे। ऊपरे ऊपरे उड़त अफवाह म सब डरत हे। वैक्सीन लगाके कोरोना ले निजात पाना हे.. हम सब ल जाके वैक्सीन लगवाना हे। कोनो कहिथे वैक्सीन ले बांझ होवत हे नारी। जादा दिन नइ होहे फेर पता कैसे चलगे संगवारी। इही बात ल नारी मन ल समझाना हे.. हम सब ल जाके वैक्सीन लगवाना हे। नपुंसक होये के बात घलो फइलावत हे। डाँक्टर मन थकगे वो नपुंसक ल नइ पावत हे। कौआ ले गे कान ल खोजे बर नइ जाना हे.. हम सब ल जाके वैक्सीन लगवाना हे। वैक्सीन ले होवत हे कइथे बड़े बड़े बीमारी। कतको लगवा डरिस आवत नइहे कखरो पारी। कहवइया ल काहन दे हमला नइ घबराना हे.. हम सब ल जाके वैक्सीन लगवाना हे। फेर अही कहिथे कोरोना के तीसरा लहर। एखर ले जादा देखाही अपन बड़े कहर। आये के पहली ए उपाय ल अपनाना हे.. हम सब ल जाके वैक्सीन लगवाना हे। अशिक्षित मन ल हम सब मिल समझाबो। शिक्षित हन त थोरिक कर्तव्य ल निभाबो। पोलियो ल भगायेन अब कोरोना ल भगाना हे.. भैया समारू अफवाह मे नइ जाना हे। हम सब ल जाके वैक्सीन लगवाना हे।         🖋️पवन नेताम 'श्रीबासु' ...