बच्छर म एक दिन आथे ये तीजा चुररुस ले बाजे करेला के बीजा पहिरे बर मिलथे वो रंग रंग के लुगरा लुगरा बर कर डारेन कूद कूद के झगरा रात भर मसके हन करू करू भात दिनभर उपास करेन नारी के ज...
आज मेरे मित्र के घर मृतक भोज मे जाकर जो दुख हुआ और समाज की रीत पर जो विचार आया वह विचारणीय पंक्तियाँ प्रेषित है अपना विचार जरूर देवें.... किसी के माथ की बिंदिया लूटी, लूटी सिंदूर...