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जनवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुक्तक

हमारे दिल के अंधेरो मे रोशनी दे दो। करले तु मोहाब्बत जिन्दगी दे दो। किया भूख ने मजबूर खुदखुशी के लिए। मिटा न सको भूख तो खुदखुशी दे दो। करू जो जिक्र मोहाब्बत तो बावला होकर। म...

तहू लेले न मजा संगी रे..

तहू लेले न मजा संगी रे *************************** दुनिया चटक मटक हे, तै काबर अटकगे। छिलका ल भिखारी खावय, गुदा ल नेता शिकारी खावय। तहू लेले न मजा संगी रे... तहू लेले न मजा संगी रे... फाईल फाईल म अटकत हे, ने...

खुद से दूर जाने लगे

................ *गज़ल*.................. मिन्नतों के बाद भी जो कभी मिला नही न जाने क्यों आज वो पास आने लगे! जिन्हें अपना बनाने के बुने थे कई सपने उन सपनों को वो हकीकत बनाने लगे। मरुथल सा था दिल मेरा आबाद  हो ...

शेर

कोई पूछते फुल खिले तो कैसे लगते है। कोई पुछते दिल मिले तो कैसे लगते है। अब वो मिले तो इसे दिखाकर कहूँगा, तेरे सवाल के जवाब मे ये कैसे लगते है।               *पवन नेताम "श्रीबास...

दारू तिहार मनाना हे

राशन संग दारू पाये बर,कका ल दुबारा लाना हे। बोनस तिहार मनागे, अब दारू तिहार मनाना हे। ऐसो दारू खूब छागे, लोगन ल सरकारी चोचला भागे। सरकार ठेका लीस त, चखना म छ.ग.चना मुर्रा आगे। अ...