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मतला

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अपना शहर आशिको का डेरा हैं, सनम... यहाँ सवेरा सूरज से नही किसी के  दीदार से होता है.... पवन नेताम "श्रीबासु"

मुक्तक

किया था ईजहार प्यार पाने को, मिलाया यूँ नजर दिल सजाने को। पता न था हश्र इस मोहब्बत का, की दिल को लगाया सजा पाने को। सफर के बाद साथ छूटना ही था शीशा था एक दिन टूटना ही था इश्क तो क...