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मतला

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मेरी बाकी उंगलियां उस उंगली से जलती है.. . जिस उंगली को पकड़कर मेरी सनम चलती है....!!

मुक्तक

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फिर कोई मेहंदी लगा रही है फिर कोई तुझे  तड़पा रही है पवन तेरी किस्मत फूटी है, फिर कोई छोड़कर जा रही है       पवन नेताम 'श्रीबासु'

मतला

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ऐ सागर हमे तेरी चादर नही,  गहराई चाहिये, जो मेरी गमो को अपनी भू-तल मे दफना दे..           पवन नेताम 'श्रीबासु'

मुक्तक

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तस्वीर तेरी मेरे नैनन मे याद तेरी है मेरे मन मे अब जीना भी क्या जीना जब तू ही नही जीवन मे अब फुट गया मेरा दर्पण फिर भी किये हो श्रिंगार भूल गई 'पवन'का प्यार

आज के राजनीतिक बेवस्था

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वाह रे राजनितिक बेवस्था, अपन करत हे विकास, जनता होवत हे बर्बाद। नेता ह योजना ल  गटकत हे। किसान ह फांसी म लटकत हे।। इहा  होवत  हे  मरे बिहानी। का अईसने म होही किसानी।। जइसे हावय झंडू बाम, एक बाम तीन काम, झूठ,लूट,घुसखोरी हे पहचान।। अऊ लूटमारी हे बेकिंग राज। जेमा अंदर तो होवत हे बदमाश। पर जनता  ल बेंक  लूटत हे। जइसे मूसवा ल बिलई तुकत हे।। ट्रांजक्शन कहू तीन ले पार होही। 173 रूपया के लूटमार होही।। वाह रे राजनितिक बेवस्था, अपन करत हे विकास, जनता होवत हे बर्बाद। 💥💥💥💥💥💥💥💥      पवन नेताम 'श्रीबासु'      सिल्हाटी, स/लोहारा