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किसान और टमाटर

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मैं छत्तीसगढ़ के जिस इलाके (खैरागढ़ छुईखदान गंडई) से आता हूँ, वह मैकल पर्वत श्रेणी का पूर्वी भाग है । राजनांदगांव-कवर्धा रोड के पश्चिम में मैकल पर्वत श्रेणी है और उसके पूर्व से मैदानी इलाका शुरू हो जाता है । यहाँ की काली मिट्टी बेहद उपजाऊ है जो ओन्हारी (रबी) फ़सल के लिए अनुकूल है । इस क्षेत्र में पहले चना की फ़सल खूब ली जाती थी और वैसे ही पैदावार भी होता था । यहाँ चना की एक देसी किस्म 'सुंदरी' एक बड़े रकबे में बोई जाती थी, जो खाने में बहुत स्वादिष्ट थी । मार्केट में हाईब्रिड बीज के आने से यह किस्म विलुप्त हो गई ।           यहाँ टमाटर की फ़सल भी खूब होती थी और आज भी होती है । सहसपुर लोहारा से साजा तक, साजा से धमधा तक, धमधा से जालबाँधा-घुमका और ठेलकडीह तक और वहाँ से मैकल श्रेणी का पाद प्रदेश अर्थात खैरागढ़ छुईखदान गंडई का यह इलाका टमाटर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है । लेकिन यहाँ टमाटर का जितना उत्पादन होता है उसका वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है । एक तो टमाटर का भाव नहीं रहता । आज लगभग चार माह हो गये, मंडी में उसकी कीमत लगभग 3-4 रुपये किलो से ज्यादा ...