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★ *'बाँड़ी कुकुर'* ! ★

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◆◆◆(व्यंग्य)◆◆◆ आजकल के ये बाँड़ी कुकुर ह देख  कइसन किस्मत  पाय हे, कुकुर के वो  ठाठबाट देख के कतको मनखे घलो लजाय हे ! का-का कुकुर के ठसका हवय अउ कइसन- कइसन शान हे, इँहा  कतको के जीना मुस्कुल कुकुर बर राजसी खानपान हे ! ये संझा- बिहना वॉक म जाथे एसी म रहीथे अउ गद्दा म सोथे, मालिक अउ मालकिन के सङ्ग फुर्र-फुर्र, मोटर-गाड़ी म उड़थे ! वो बड़े- बड़े  मेम  साहब  मन  सङ्ग-सङ्ग,पियाथे अउ खवाथे, पाथे-पोटारथे,मुँहु ल चुमवाथे ये अपन सङ्ग म घलो सोवाथे ! कुकर बर  उँचहा साबुन, शैम्पू दूध, बिस्कुट ,चिकन, मटन  हे, कतको  बर  नइहे  जरहा रोटी कुकुर बर आगु-आगु जतन हे ! कुकुर ल अब  कुकुर नइ काहँय अँग्रेजी म बड़का  नाम धराय हे , "अगले जनम मोहे कुकुर दीजो" आज सिरतोन कतको सधाय हे !             -- *राजकुमार 'मसखरे'* (इसे हल्केपुलके व्यंग्य ही मानें,कुत्ता भी एक जीव है, उन्हें भी पूरा अधिकार है,अन्यथा न लें 🙏🏼)