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महिलाओं हेतु सुखमय जीवन के तीन मूल मंत्र

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*महिलाओं हेतु सुखमय दाम्पत्य जीवन पाने के तीन मूल मंत्र...* महिलाएं अपने दाम्पत्य जीवन मे दुख,समस्याओं या कष्ट भरे जीवन महसूस करते है,जिनके घर क्लेश आते-जाते रहते है उन महिलाओं को ये तीन साधन को अवश्य साध लेना चाहिए जिनसे उनका दाम्पत्य जीवन अवश्य सुखमय हो सकता है- *पहला मर्यादा रूपी सीमा के अंदर रहना।* मर्यादा भंगता का परिणाम हम सभी सूर्पनखा की दशा को याद कर जान सकते है। कहा अपना घर,देश की सीमा को लांघ कर दुसरे के घर,परिवार या ये कहे कि परवेश मे प्रवेश करने की मात्र कोशिश ने उनको ये परिणाम दिया। परिणाम संक्षिप्त मे कहे तो अपना नाम नक कटी और  भईखई धरा लिया भाई (मायके)के कुल की समाप्ति । *दुसरा सुसंस्कार रूपी साधन(धरण) को धारण कर लेना।* ये संस्कार ही है जिनके कारण चरित्र की बखान होती है,चाहे वह सुसंस्कार हो या कुसंस्कार। भारत देश को अन्य देश संस्कार के कारण पूजते है,विश्व गुरू मानते है। वनवास काल मे अत्रि ऋषि ऋग्वेद के पंचम मंडल के द्रष्टा के द्वारा भगवान राम संस्कार लेना तथा अत्रि ऋषि पत्नी अनुसूइया, जो दक्ष प्रजापति की चौबीस कन्याओं में से एक थी उनके द्वारा माता जानकी को बताये गये ...