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भारत सा देश मेरा, कहीं और नही नही

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भारत सा देश मेरा, कहीं औऱ नही नही। ये धरती से स्वर्ग मेरा,  कहीं और नही नही।। ऋषियों ने तप किये है, हजारों हजार साल। भागीरथी ने लाया है गंगा को यूं उतार।2। मेरे राम-श्रवन सा बेटा  कहीं और नही नही।। ये धरती से------ सतियों की ये धरा है  महिमा है अपार। गंगा है मात मेरी जो करती है उद्धार।2। यहाँ राधा मीरा सा प्रेम कहीं और नही नही। ये धरती से........ गीता का ज्ञान बांटने, वाले को है नमन। विष को पीने वाले, मेरे भोले को है नमन। यहां सबरी की जैसे भक्ति कहीं और नही नही  ये धरती से........ भारत सा देश मेरा कहीं और नही नही धरती से स्वर्ग मेरा  कहीं और नही नही। लक्षमण ,भरत सा भाई  कहीँ औऱ नही नहीं  । भारत सा देश मेरा कहीँ औऱ नही नही। रचनाकार -डॉ तुलेश्वरी धुरंधर अर्जु नी,जांगड़ा,बलौदाबाजार। एक परिचय  डॉ तुलेश्वरी धुरंधर पति- श्री कृष्ण कुमार धुरंधरउम्र    उम्र- 43 वर्ष शिक्षा-  एम ए राजनीति एम ए लोकप्रशासन  ,एम फिल,पी एच  डी  ...