मुक्तक संग्रह
मेरी कलम से... मुल्क का मौसम बदलते जा रहे है! कई लूट गया कई लुटते जा रहे है! न जाने कितने बेवफ़ा भरे जमाने मे, हर आश़िक का दिल टुटते जा रहे है! बाली चाँदी के थे सोने का दाम क्यो लिखा। जो हुआ ही नही था प्रेम तो अंजाम क्यो लिखा। गर है जरा भी नही मुझ नाचीज़ से दिल्लगी, तो छुप-छुप के मेंहदी से मेरा नाम क्यो लिखा। बिजली चमक रही है,बादल गरज रहे है। टकराई दो जवानी, सोला धधक रहे है। तूने झुकाई जो निंगाहे, अंधेरा हो आया, वार हमपे हो रहा है,कातिल समझ रहे है। गरजता है बरसता है, प्रणय मनुहार करता है! बड़ी सिद्दत सेअपने,प्यार का इजहार करता है! जरा भी रुठ जाऊँ तो,न आता चैन है उनको, मनाता है हँसाता है, मुझे वो प्यार करता है! मोहब्बत की कहानी, सुनाने कौन आएगा! दिले नादां पे एतबार, जताने कौन आएगा! वाद़ा रहा कभी तुमसे , खिलाफ़ी नही होगी, तुम्ही गर रूठ जाओगे,मनाने कौन आएगा! मुझे रह रह के तेरा मुस्कुराना याद आता है। वो नजरो से तेरा प्यार जाताना याद आता है। जो पूनम भी, तुझे देखे, तो वो शरमा जाये, वो चेहरे से तेरा जुल्फ़ हटाना याद आया...